दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट का फैसला — लालू, राबड़ी और तेजस्वी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप तय।
पहले फेज की वोटिंग से बस 23 दिन पहले आया ये झटका, बिहार की सियासत को फिर से हिला गया है।
कोर्ट में लालू से सवाल — “क्या आप अपराध मानते हैं?”
लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव तीनों ने एक सुर में कहा — “नहीं।”
तीनों ने साफ कहा कि वे मुकदमे का सामना करेंगे।
अब मामला ट्रायल तक पहुंच गया है — और अगर आरोप साबित हुए, तो लालू परिवार के लिए यह सिर्फ़ कानूनी नहीं, राजनीतिक भूकंप साबित हो सकता है।
IRCTC घोटाला: रेल के होटलों से जमीन तक का सौदा
2004 से 2009 तक लालू यादव रेल मंत्री थे।
इसी दौरान रेल मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले IRCTC के BNR रांची और BNR पुरी होटलों के टेंडर जारी हुए।
CBI के अनुसार इन टेंडरों में सिस्टमेटिक धांधली की गई — और सुजाता होटल्स को फायदा पहुंचाया गया।
बदले में सुजाता होटल्स ने पटना की 3 एकड़ की जमीन मामूली कीमत पर डिलाइट कंपनी को दी।
बाद में राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव की लारा प्रोजेक्ट्स ने उसी कंपनी के शेयर खरीद लिए।
📊 जब ये डील हुई, उस जमीन की मार्केट वैल्यू करीब ₹94 करोड़ थी।
यहीं से मामला उजागर हुआ — और CBI ने 2017 में केस दर्ज किया।
अब कानूनी फ्रेम में लालू परिवार
13 अक्टूबर 2025 को स्पेशल जज विशाल गोगने ने लालू परिवार पर आरोप तय किए।
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लालू यादव पर: IPC 120B, 420 और Prevention of Corruption Act की धारा 13(2)
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राबड़ी देवी और तेजस्वी पर: IPC 120B (साजिश) और 420 (धोखाधड़ी)
सीनियर एडवोकेट सर्वदेव सिंह कहते हैं — “अगर आरोप साबित हो गए तो 7 साल तक की सजा हो सकती है, लेकिन ट्रायल में 5–10 साल लग सकते हैं।”
यानी अभी खेल लंबा है… लेकिन हर दिन तेजस्वी के लिए सियासी परीक्षा होगा।
तेजस्वी का तेवर — “हम बिहारी हैं, बाहरी से नहीं डरते”
कोर्ट के फैसले के बाद तेजस्वी ने X (पूर्व Twitter) पर लिखा —
“जब तक संविधान विरोधी BJP सत्ता में है, हम लड़ेंगे और जीतेंगे।”
लालू यादव ने भी कहा — मामला राजनीति से प्रेरित है।
यानी RJD खुले तौर पर इसे पॉलिटिकल विच हंट बताकर लड़ाई को नेरेटिव का रूप दे रही है।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती…
अगर तेजस्वी दोषी ठहराए गए तो क्या होगा?
जन प्रतिनिधित्व कानून 1951, धारा 8(3) के मुताबिक —
अगर किसी विधायक या सांसद को 2 साल से ज्यादा की सजा हो जाए, तो वह तुरंत अयोग्य हो जाता है।
और सजा खत्म होने के बाद 6 साल तक वह चुनाव नहीं लड़ सकता।
📉 यानी अगर तेजस्वी को सजा मिलती है, तो RJD के लिए लीडरशिप क्राइसिस निश्चित है।
लालू–राबड़ी पहले ही सक्रिय राजनीति से दूर हैं, और तेजस्वी ही पार्टी का चेहरा हैं।
‘नई राबड़ी’ की एंट्री? राजश्री का नाम क्यों चल रहा है
RJD के संविधान में हाल ही में धारा 35A में संशोधन किया गया — अब तेजस्वी को वो सभी पावर मिल गई हैं जो लालू के पास थीं।
अगर तेजस्वी को सजा होती है, तो वे ‘राबड़ी मॉडल’ दोहरा सकते हैं — अपनी पत्नी राजश्री यादव को कमान दे कर।
सीनियर जर्नलिस्ट इंद्रभूषण कहते हैं,
“लालू ने चारा घोटाले के वक़्त राबड़ी को CM बनाया था, तेजस्वी भी वैसा ही कदम उठा सकते हैं ताकि पार्टी पर काबू न छूटे।”
यानी सियासत का पूरा सर्कल फिर वहीं लौट सकता है — राबड़ी 2.0 के रूप में।
RJD में भीतरघात का खतरा
तेजस्वी के खिलाफ़ अगर स्थिति बनी तो परिवार के भीतर से ही चुनौतियाँ उभर सकती हैं।
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रोहिणी आचार्य ने हाल में X पर तेजस्वी के करीबी संजय यादव पर निशाना साधा।
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तेज प्रताप यादव पहले ही अलग पार्टी बना कर हमले तेज़ कर चुके हैं।
यानी परिवार के भीतर भी सत्ता की दौड़ तेज़ हो सकती है।
IRCTC केस की टाइमलाइन
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जुलाई 2017: CBI ने केस दर्ज किया और 12 ठिकानों पर छापे पड़े।
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दिसंबर 2018: चार्जशीट फाइल हुई।
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मई 2025: कोर्ट ने फैसला रिजर्व किया।
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13 अक्टूबर 2025: लालू परिवार पर आरोप तय — अब ट्रायल शुरू।
ED भी मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच कर रही है।
क्या RJD लालू परिवार से बाहर जा सकती है?
इतिहास कहता है — मुश्किल।
1997 में जब लालू पर चार्जशीट दाखिल होने वाली थी, उन्होंने जनता दल से अलग होकर RJD बनाई और स्वयं अध्यक्ष बने।
तब भी परिवार ही केंद्र में था, और आज भी है।
यानि RJD का DNA ‘फैमिली-सेंट्रिक’ है।
और अगर संकट आता है, तो नई राबड़ी का जन्म लगभग निश्चित है।
अब नज़र अगले चरण पर…
ट्रायल के साथ ही बिहार की राजनीति का नया सीजन शुरू हो गया है।
तेजस्वी के लिए यह केवल कानूनी लड़ाई नहीं, राजनीतिक जीवन-मरण का सवाल है।
अब देखना दिलचस्प होगा — क्या राजश्री वाकई ‘राबड़ी 2.0’ बनेंगी या तेजस्वी स्वयं इस संकट से निकालेंगे अपनी पार्टी को?