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Bihar Election: महागठबंधन में सीट शेयरिंग पर बढ़ी तकरार, कांग्रेस-राजद में खिंचतान तेज

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग पर मचा घमासान अब खुलकर सामने आने लगा है। कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बीच इस मसले पर जारी खींचतान अपने चरम पर है। कांग्रेस ने अब राजद पर दबाव बढ़ा दिया है और साफ संकेत दे दिए हैं कि अगर सम्मानजनक सीटें नहीं दी गईं तो पार्टी अपने दम पर मैदान में उतरने से पीछे नहीं हटेगी। वहीं, दूसरी तरफ राजद नेतृत्व अपने पुराने सहयोगियों को साधने की कोशिश में जुटा हुआ है।

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस का कहना है कि महागठबंधन की मजबूती तभी संभव है जब सभी दलों को बराबरी का सम्मान मिले। पार्टी नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि राजद ने सीट बंटवारे में एकतरफा रवैया अपनाया तो कांग्रेस अपने प्रत्याशी घोषित कर देगी। इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव की मुलाकात आज दिल्ली में होने वाली है, जिसे बेहद अहम माना जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी में होगी, जहाँ सीटों के अंतिम बंटवारे पर चर्चा होनी तय है।

तेजस्वी यादव और उनकी मां राबड़ी देवी आज IRCTC घोटाले के मामले में कोर्ट में पेशी के लिए दिल्ली रवाना हुए हैं। ऐसे में यह बैठक राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि बिहार में विपक्षी गठबंधन के भीतर तालमेल की परीक्षा इसी पर निर्भर करेगी। बताया जा रहा है कि कांग्रेस की केंद्रीय नेतृत्व की ओर से साफ संदेश दिया गया है कि सम्मानजनक सीट शेयरिंग नहीं होने पर पार्टी को कोई समझौता मंजूर नहीं होगा।

इसी बीच, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान से अलग हुए गुट के प्रमुख पशुपति कुमार पारस ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक, पारस आज अपने दलित नेताओं के साथ बैठक करने वाले हैं, जिसमें राजद के साथ विलय की संभावनाओं पर चर्चा हो सकती है। ऐसी खबरें भी हैं कि पारस गुट के कुछ प्रमुख नेता आगामी चुनाव में राजद के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि पूर्व बाहुबली अनंत सिंह के खिलाफ सूरजभान सिंह की पत्नी राजद से चुनाव मैदान में उतर सकती हैं, जिससे मोकामा सीट पर राजनीतिक मुकाबला बेहद दिलचस्प हो जाएगा।

वहीं, बिहार की राजनीति में आज सुबह से ही एक और घटना ने हलचल मचा दी है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की एक टिप्पणी को लेकर पटना में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। मसौरी की विधायक रेखा यादव के खिलाफ उनके समर्थकों ने नारेबाज़ी की और पार्टी दफ्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इससे यह साफ जाहिर होता है कि राजद के भीतर भी असंतोष की लहर धीरे-धीरे सिर उठाने लगी है।

महागठबंधन के एक अन्य सहयोगी पप्पू यादव ने भी इस पूरे मामले में तेजस्वी यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सीट शेयरिंग में हो रही देरी का असर जनता के बीच गलत संदेश के रूप में जा रहा है। पप्पू यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “जब नाश मनुष्य पर छाता है, तो पहले विवेक मर जाता है।” उनके इस बयान को सीधे तौर पर तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर तंज के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस का सम्मान बनाए रखना महागठबंधन की जिम्मेदारी है, और अगर देरी जारी रही तो विपक्षी एकता को नुकसान होगा।

अब सबकी निगाहें दिल्ली की बैठक पर टिकी हैं, जहाँ आज राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और खड़गे के बीच सीटों पर आखिरी दौर की बातचीत होनी है। माना जा रहा है कि 13 अक्तूबर को महागठबंधन की ओर से सीट बंटवारे का अंतिम ऐलान किया जाएगा। हालांकि, अंदरखाने चल रही खींचतान को देखते हुए यह भी संभव है कि ऐलान की तारीख आगे बढ़ा दी जाए।

कांग्रेस और राजद दोनों ही अपने-अपने स्तर पर रणनीति बनाने में जुटे हैं। जहां कांग्रेस 70 से अधिक सीटों की मांग पर अड़ी हुई है, वहीं राजद इतना बड़ा हिस्सा देने को तैयार नहीं दिख रहा। जदयू के बिखरने के बाद बने नए राजनीतिक समीकरणों में राजद खुद को मुख्य भूमिका में देख रहा है और वह चाहती है कि कांग्रेस उसकी शर्तों पर आगे बढ़े।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर सीट शेयरिंग का मुद्दा सुलझ गया, तो महागठबंधन मजबूत होकर चुनाव में उतर सकता है, लेकिन अगर यह विवाद लंबा खिंचा, तो विपक्षी एकता पर गंभीर असर पड़ सकता है। आने वाले दो दिन बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की मुलाकात महागठबंधन में नई ऊर्जा भर पाती है या फिर यह खींचतान चुनावी समीकरणों को और उलझा देती है।

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